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संपत्ति · vitark.ai

फ्लैट खरीद रहे हैं? ये कानूनी जांच आपको बचाएगी

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सार

फ्लैट शायद आपकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी खरीद है, और जिस खरीदार ने जांच नहीं की उसे कानून नहीं बचाता। तीन जांच सबसे ज़्यादा लोगों को बचाती हैं। पहली, टाइटल ख़ुद सत्यापित करें, मालिकाना दस्तावेज़ों की कड़ी पीछे तक जांचकर, क्योंकि म्यूटेशन की एंट्री या बिल्डर का ब्रोशर मालिकाना हक का प्रमाण नहीं है। दूसरी, ऐसे फ्लैट का कब्ज़ा कभी न लें जिसका ऑक्यूपेंसी और पूर्णता प्रमाणपत्र (occupancy/completion certificate) न हो; बिल्डर इन्हें लेने के लिए कानूनन बाध्य है, और न ले तो आप कब्ज़ा लेने से मना कर ब्याज सहित पूरी वापसी मांग सकते हैं। तीसरी, पक्का करें कि परियोजना रेरा (RERA) में पंजीकृत है, और भार (encumbrance) व मुकदमों की जांच कराएं, ताकि आप कोई गिरवी, विवादित या कुर्क संपत्ति न खरीद बैठें। ये सब भुगतान से पहले करें, बाद में नहीं।

कानून क्या कहता है

कानून सावधान खरीदार को बचाता है, भरोसा करने वाले को नहीं

भारतीय संपत्ति कानून जांच का बोझ खरीदार पर डालता है। अगर बाद में पता चले कि विक्रेता असल में फ्लैट का मालिक ही नहीं था, तो आप सिर्फ़ यह नहीं कह सकते कि आपने उस पर भरोसा किया था। इसीलिए ये जांच खानापूर्ति नहीं हैं। हर एक जांच उस रास्ते को बंद करती है जिससे भुगतान के बाद आप फ्लैट या अपना पैसा गँवा सकते हैं। भरोसे में बिना पड़ताल किए खरीदने वाले को कानून का संरक्षण नहीं मिलता।

टाइटल, भार और मुकदमे: मालिकाने की जांच

टाइटल। पक्का करें कि विक्रेता वही बेच रहा है जिसका वह सचमुच मालिक है। मालिकाने की कड़ी को मूल दस्तावेज़ों, यानी पुराने बिक्री विलेख, दान विलेख या उत्तराधिकार के रिकॉर्ड, के ज़रिए कुछ दशक पीछे तक जांचें, बेहतर हो किसी वकील से टाइटल सर्च कराकर। एक बड़ा जाल: नगरपालिका या राजस्व रिकॉर्ड में म्यूटेशन की एंट्री मालिकाना दस्तावेज़ नहीं है। सिर्फ़ म्यूटेशन के भरोसे रहना काफ़ी नहीं।

भार (Encumbrance)। पक्का करें कि संपत्ति पर कोई छिपा हुआ भार, यानी मौजूदा गिरवी, कर्ज़ या लियन, न हो। सब-रजिस्ट्रार से भार प्रमाणपत्र (encumbrance certificate) लें, जो एक अवधि में संपत्ति पर पंजीकृत लेन-देन और भार दिखाता है। रजिस्ट्री के रिकॉर्ड की पूरी जांच ही आपको बचाती है।

मुकदमे और कुर्की। संपत्ति या परियोजना पर किसी लंबित मुकदमे, निषेधाज्ञा (injunction) या सरकारी कुर्की की जांच करें। मुकदमा लंबित रहते हुए की गई बिक्री 'lis pendens' के सिद्धांत की चपेट में आती है और उस मुकदमे के नतीजे के अधीन रहती है, इसलिए वह आपके लिए बेकार हो सकती है। इसी तरह, बकाया वसूली के लिए कुर्क हो चुकी संपत्ति का हस्तांतरण अवैध होता है।

रेरा पंजीकरण और स्वीकृत नक्शा

किसी नियोजन क्षेत्र की परियोजना के लिए, Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 की Section 3 प्रमोटर को परियोजना पहले रेरा में पंजीकृत किए बिना विज्ञापन, विपणन, बुकिंग या बिक्री करने से रोकती है। इसलिए परियोजना का रेरा पंजीकरण नंबर पक्का करें, और जांचें कि जो बेचा जा रहा है वह स्वीकृत नक्शे (sanctioned plan) और रिकॉर्ड की मंजूरियों से मेल खाता है।

कुछ काम की बातें। रेरा उन सभी चालू परियोजनाओं पर लागू होता है जिनके लिए अधिनियम लागू होने तक पूर्णता प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ था, जैसा सुप्रीम कोर्ट ने M/S. Newtech Promoters बनाम State of UP (2021) में तय किया। यहां तक कि एक अकेला फ्लैट बनाकर बेचने वाला व्यक्ति भी अधिनियम के तहत 'प्रमोटर' हो सकता है। और अगर परियोजना पंजीकृत नहीं है, तो यह चेतावनी का संकेत है, पर इससे आपके उपाय ख़त्म नहीं होते: अपंजीकृत परियोजना के विरुद्ध भी खरीदार रेरा जा सकते हैं, और ऐसी परियोजनाओं के लिए दीवानी अदालत भी खुली रहती है। पूर्णता प्रमाणपत्र भी रबर-स्टाम्प नहीं है; जहां वैध पहुंच मार्ग जैसी बुनियादी सुविधा गायब हो, वहां अदालतें प्रमाणपत्र के बावजूद परियोजना को 'चालू' मान सकती हैं।

ऑक्यूपेंसी और पूर्णता प्रमाणपत्र: बिल्डर का कर्तव्य

यही जांच अक्सर विवाद तय करती है। Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 की Section 11 के तहत प्रमोटर को सक्षम प्राधिकारी से पूर्णता प्रमाणपत्र और ऑक्यूपेंसी प्रमाणपत्र लेकर कब्ज़ा देने से पहले सौंपना होता है। यह ऐसा कर्तव्य है जो टाला नहीं जा सकता; बिल्डर इसे आप पर नहीं डाल सकता या इन मंजूरियों के बिना फ्लैट लेने को नहीं कह सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने Dharmendra Sharma बनाम Agra Development Authority (2024) में माना कि पूर्णता प्रमाणपत्र और अग्निशमन अनापत्ति (fire NOC) के बिना कब्ज़े की पेशकश पूरी तरह अवैध है, यह सेवा में कमी है, और खरीदार ब्याज सहित वापसी का पात्र है। बिल्डर के लिए इसके गंभीर परिणाम ही आपकी ढाल हैं। साथ ही, आपके उपभोक्ता उपाय रेरा के अतिरिक्त हैं, उसकी जगह नहीं, इसलिए आप मंच चुन सकते हैं, और बिल्डर के एकतरफ़ा अनुबंध की शर्तें आप पर बाध्यकारी नहीं हैं।

आप क्या कर सकते हैं

इसे अपनी खरीद-पूर्व चेकलिस्ट मानें। कोई भी बड़ी रकम देने से पहले हर कदम पूरा करें।

  1. मूल दस्तावेज़ों से टाइटल सत्यापित करें। मालिकाने के विलेखों की कड़ी कुछ दशक पीछे तक लें और किसी वकील से टाइटल सर्च कराएं। म्यूटेशन एंट्री, ब्रोशर या आवंटन पत्र को यह प्रमाण न मानें कि विक्रेता फ्लैट का मालिक है।
  2. भार प्रमाणपत्र लें। सब-रजिस्ट्रार से लें ताकि संपत्ति पर पंजीकृत गिरवी, कर्ज़ या भार दिख जाएं, और रजिस्ट्री रिकॉर्ड की जांच कराएं ताकि कुछ छिपा न रह जाए।
  3. मुकदमों और कुर्की की जांच कराएं। देखें कि संपत्ति या परियोजना किसी लंबित मुकदमे, निषेधाज्ञा या कुर्की में तो नहीं। मुकदमे के दौरान या कुर्क संपत्ति का हस्तांतरण आपको खाली हाथ छोड़ सकता है।
  4. रेरा पंजीकरण पक्का करें और स्वीकृत नक्शे से मिलाएं। परियोजना का रेरा पंजीकरण नंबर और यह पक्का करें कि फ्लैट व लेआउट स्वीकृत नक्शे और मंजूरियों से मेल खाते हैं। परियोजना अपंजीकृत हो तो इसे चेतावनी मानें, हालांकि आपके रेरा और दीवानी उपाय बने रहते हैं।
  5. ऑक्यूपेंसी और पूर्णता प्रमाणपत्र के बिना कब्ज़ा न लें। ये बिल्डर का कानूनी कर्तव्य हैं। ये न हों, तो आप कब्ज़ा लेने से मना कर ब्याज सहित वापसी मांग सकते हैं, इसलिए इनके बिना किसी को आपको चाबियां थमाने की जल्दी न करने दें।
  6. मंजूरियां और विक्रेता का अधिकार जांचें। बिल्डिंग प्लान, लेआउट और पूर्णता की मंजूरियां देखें। रीसेल फ्लैट के लिए विक्रेता का अपना टाइटल और यह पक्का करें कि कोई सह-मालिक या वारिस बिक्री से सहमत हैं।
  7. बिक्री विलेख पंजीकृत कराएं, और एकतरफ़ा शर्तें न मानें। बिक्री का पंजीकरण Registration Act के तहत ज़रूरी है। अनुबंध पढ़ें, और याद रखें कि बिल्डर की दमनकारी, एकतरफ़ा शर्तें बाध्यकारी नहीं हैं, इसलिए कोई ख़राब शर्त आख़िरी बात नहीं है।

अहम फैसले

Dharmendra Sharma बनाम Agra Development Authority (सुप्रीम कोर्ट, 2024). कोर्ट ने माना कि पूर्णता प्रमाणपत्र और अग्निशमन अनापत्ति (fire NOC) के बिना बिल्डर द्वारा कब्ज़े की पेशकश पूरी तरह अवैध है। यह सेवा में कमी मानी जाएगी, और खरीदार अपनी जमा राशि की ब्याज सहित वापसी का पात्र है।

Imperia Structures बनाम Anil Patni (सुप्रीम कोर्ट, 2020). कोर्ट ने माना कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपाय रेरा के अतिरिक्त और समवर्ती हैं, उसकी जगह नहीं। घर खरीदार यह चुन सकते हैं कि वे उपभोक्ता मंच में जाएं या रेरा में, क्योंकि रेरा की धारा 79 का बार उपभोक्ता अदालतों पर लागू नहीं होता।

Dipika Pathak बनाम Dhiraj Kumar Saikia (गौहाटी उच्च न्यायालय, 2022). कोर्ट ने माना कि जब परियोजना रेरा में पंजीकृत नहीं है और यह सिद्ध नहीं होता कि मामला अनिवार्य रूप से रेरा के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो रेरा की धारा 79 दीवानी अदालत के क्षेत्राधिकार पर रोक नहीं लगाती, और खरीदार का दीवानी वाद चल सकता है।

Harendra Kumar Roy बनाम State of U.P. (इलाहाबाद उच्च न्यायालय, 2025). खरीदारों के पक्ष में रेरा आदेश के बावजूद बिल्डर ने आवंटन रद्द कर दिया था। कोर्ट ने निर्देश दिया कि रेरा के समक्ष प्रवर्तन और वसूली की कार्यवाही लंबित रहते हुए विवादित संपत्ति पर कोई तीसरे पक्ष का अधिकार सृजित नहीं किया जाएगा।

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यह लेख जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कानूनों और फैसलों का सार है। गंभीर मामलों में लाइसेंसशुदा वकील से सलाह लें। पूरा डिस्क्लेमर पढ़ें।

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