vitark.ai BLOG
Product Principles Blog FAQ
Sign in Request access →
Product Principles Blog FAQ Sign in
Request access →
होम›ब्लॉग›किराया और मकान
किराया और मकान · vitark.ai

मकान मालिक सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं लौटा रहा? जानिए कानून क्या कहता है

Read this article in English →
सार

मकान मालिक सिर्फ नुकसान का आरोप लगाकर आपका सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं रोक सकता। अदालतें कटौती तभी मानती हैं जब आपकी लापरवाही और मरम्मत का असली खर्च साबित हो। आपका रास्ता वसूली का दीवानी मुकदमा है, और देरी पर अदालतें ब्याज भी दिलाती हैं, भले ही एग्रीमेंट में ब्याज का जिक्र न हो। एक सावधानी जरूरी है: पहले मकान पूरी तरह खाली करके चाबी सौंप दें, क्योंकि अदालतें इसे आपकी तरफ की जिम्मेदारी मानती हैं।

कानून क्या कहता है

सिक्योरिटी डिपॉजिट पर कोई एक अखिल भारतीय कानून नहीं है। नियम अनुबंध कानून, राज्यों के किराया कानूनों और उच्च न्यायालयों के लगातार एक जैसे फैसलों से बनते हैं।

केस कानून से तीन सिद्धांत साफ निकलते हैं:

डिपॉजिट आपका पैसा है। किरायेदारी खत्म होने और कब्जा सौंपने के बाद मकान मालिक डिपॉजिट सिर्फ साबित हुए बकाये के बदले ही रोक सकता है। अदालतें मानती हैं कि बिना वास्तविक नुकसान साबित किए डिपॉजिट से मनमानी कटौती या रोजाना के हिसाब से जुर्माना वसूलना भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 73 और धारा 74 के तहत अवैध है (बॉम्बे हाई कोर्ट, Mangla International Pvt. Ltd. v. Next Media Works Ltd., 2023)।

देरी पर ब्याज मिलता है। एग्रीमेंट में ब्याज की शर्त न भी हो, तो भी बिना वजह डिपॉजिट रोकना अदालतों की नजर में 'अनुचित संवर्धन' है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने दस साल तक डिपॉजिट रोकने पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ वापसी का आदेश दिया (Cauvery Coffee Traders v. New Mangalore Port Trust, 2024)। ब्याज दिलाने का आधार सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 34 है।

पहले कब्जा, फिर वसूली। आम नियम यह है कि डिपॉजिट न मिलने के बहाने आप मकान पर कब्जा नहीं रोक सकते; ऐसा करने पर उस अवधि का किराया आप पर चढ़ता रहेगा (दिल्ली हाई कोर्ट, M/S Ansal Housing And Construction Ltd v. Mrs Hardarshan Kaur, 2025)। इसका एक अहम अपवाद है: अगर एग्रीमेंट में साफ लिखा हो कि डिपॉजिट की वापसी और कब्जा सौंपना एक दूसरे से जुड़े 'पारस्परिक वादे' हैं, तो रिफंड मिलने तक कब्जा रखना वैध है और उस दौरान किराया भी नहीं बनता (राजस्थान हाई कोर्ट, Mahendra Kaur Arora v. Rent Appellate Tribunal, 2012)।

आप क्या कर सकते हैं

  1. मकान पूरी तरह खाली करें और चाबी सौंपने का लिखित या ट्रेस होने लायक सबूत रखें। यही मकान मालिक की सबसे बड़ी दलील बंद करता है।
  2. डिपॉजिट की मांग लिखित में करें। मूल डिपॉजिट का भुगतान रिकॉर्ड तैयार रखें: बैंक ट्रांसफर, रेंट एग्रीमेंट, रसीदें।
  3. मकान मालिक नुकसान का दावा करे तो आइटम के हिसाब से सबूत मांगें: क्या टूटा, आपकी लापरवाही कैसे थी, और मरम्मत के असली बिल कितने के हैं। बिना सबूत की कटौती अदालतें खारिज करती हैं।
  4. तय समयसीमा देते हुए ब्याज सहित डिपॉजिट की मांग का कानूनी नोटिस भिजवाएं।
  5. नोटिस का जवाब न आए तो आप वसूली का दीवानी मुकदमा दायर कर सकते हैं, जिसमें सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 34 के तहत ब्याज की मांग भी शामिल कर सकते हैं।

अहम फैसले

M/S Ansal Housing And Construction Ltd v. Mrs Hardarshan Kaur, दिल्ली हाई कोर्ट (2025)। अदालत ने दोहराया कि डिपॉजिट न लौटने पर किरायेदार का रास्ता वसूली का मुकदमा है, मकान पर कब्जा बनाए रखना नहीं। कब्जा रोका तो उस अवधि का किराया देना होगा।

Mahendra Kaur Arora v. Rent Appellate Tribunal, राजस्थान हाई कोर्ट (2012)। जहां एग्रीमेंट में रिफंड को कब्जा सौंपने की पूर्व शर्त बनाया गया था, वहां अदालत ने माना कि रिफंड मिलने तक कब्जा रखना पूरी तरह वैध है और इस अवधि का कोई किराया नहीं बनता। आपके एग्रीमेंट की भाषा यहां निर्णायक है।

Mangla International Pvt. Ltd. v. Next Media Works Ltd., बॉम्बे हाई कोर्ट (2023)। डिपॉजिट से मनमाना रोजाना जुर्माना काटने वाला मकान मालिक हारा, क्योंकि वास्तविक नुकसान साबित नहीं हुआ। दंडात्मक कटौती के लिए सबूत जरूरी है।

Cauvery Coffee Traders v. New Mangalore Port Trust, कर्नाटक हाई कोर्ट (2024)। बिना औचित्य डिपॉजिट रोकना अनुचित संवर्धन माना गया और अदालत ने 9 प्रतिशत सालाना ब्याज सहित वापसी का आदेश दिया, जबकि एग्रीमेंट में ब्याज की कोई शर्त नहीं थी।

यह लेख शेयर करें
LinkedIn X WhatsApp ईमेल

यह लेख जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कानूनों और फैसलों का सार है। गंभीर मामलों में लाइसेंसशुदा वकील से सलाह लें। पूरा डिस्क्लेमर पढ़ें।

इस लेख के पीछे के फैसले खुद पढ़ें

वितर्क कानूनी रिसर्च के सवालों का जवाब असली आदेशों और फैसलों के हवालों के साथ देता है।

एक्सेस का अनुरोध करें → रिसर्च मेमो डाउनलोड करें (PDF) ↓
vitark.ai

Indian legal research, simplified — in your language.

LinkedIn Email
Product
Know vitark Principles Blog FAQ
Company
Contact us Grievance Officer Terms & Conditions Privacy Policy Refund & Cancellation Delete account Legal & company info Known limitations Suppression & redaction
Vitark.ai · 2026Made in India · Not a substitute for qualified legal counsel. Cited by designUnbiased legal database of India's public court records. TLY SOFT PRIVATE LIMITEDCIN U62013DC2026PTC473011 · Registered office: Innov8 Harsha Bhawan, 4th Floor, 13/29 E-Block, Connaught Place, New Delhi 110001 · ask@vitark.ai · Queries & grievances: Hemant Chhabra, Grievance Officer (grievance@vitark.ai) · Legal & company information